حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

सरकार चले आए सरकार चले आए

On: March 5, 2025 4:40 PM
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 सरकार चले आए सरकार चले आए

हम सारे गरीबों के गमख्वार चले आए


बातिल की गिराने को दीवार चले आए

खिल्कत के लिये लेकर अन्वार चले आए

इख्लास की लेकर वो तलवार चले आए

पढ़ते हुए कल्मा सब अग्यार चले आए


सरकार चले आए सरकार चले आए


हैं आज बराहीमों मूसा भी चले आए

याकूबो सुलैमानों ईसा भी चले आए

घर में तेरे अब्दुल्लाह यहया भी चले आए

करने सभी आका का दीदार चले आए


सरकार चले आए सरकार चले आए


मरकद में थी तन्हाई का और घोर अंधेरा था

था खौफ का आलम और तारीकी ने घेरा था

पर दिल में मोहम्मद की उल्फत का बसेरा था

सरकार मेरे ले कर अन्वार चले आए


सरकार चले आए सरकार चले आए


मज़्लूमो गरीबों को कोई न सताएगा

आलम में कोई ज़ालिम अब जुल्म न ढाएगा

जो जैसा करेगा अब वो वैसा ही पाएगा

कहते हुए मज़्लूमो लाचार चले आए


सरकार चले आए सरकार चले आए


जो शाफए महशर हैं जो मालिके कौसर हैं

है आमेना के जानी अब्दुल्ला के दिल बर है

हर फर्द के है हामी हर शख़्स के यावर हैं

वो रहमते आलम वो गुमख्वार चले आये


सरकार चले आए सरकार चले आए


हर कौम के आका पर सरदारे रसूलाँ पर

जब वक्त पड़ा लोगो कोनैन के सुल्तों पर

धरती पे ओहद की और उस बदर के मैदाँ पर

जाँ देने मोहाजिर और अन्सार चले आए


सरकार चले आए सरकार चले आए
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