حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

उनकी आमद की नूरानी शब है सुब्हे नौ मुस्कुराने लगी है

On: March 5, 2025 4:40 PM
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 उनकी आमद की नूरानी शब है सुब्हे नौ मुस्कुराने लगी है

मोमिनों आओ खुशियाँ मनाएँ जाते सरकार आने लगी है


कुफ्र के छाए बादल थे हर सू और न था शिर्को बिदअत पे काबू

रहमते हक बरसने लगी जब लहलहाने लगे तेरे गेसू

अय शहे जुज़्ज़ो कुल दीं की खेती तुझसे ही लहलहाने लगी है


बे बहा हमको दौलत मिली है यानी उनकी मोहब्बत मिली

जिसको उनकी मोहब्बत मिली है उसको हर दुख से राहत मिली ह

जो गदा उनका है उसकी किस्मत बाखुदा जगमगाने लगी है


सुन के जलिम ये थर्रा गये हैं वो हबीबे खुदा आ गये है

और मज़्लूम खुश हैं वो देखो रहमते दोसरा आ गये हैं।

झूम उठी है फजा और सबा भी गीत आमद के गाने लगी है

तू तो है राहते कुल्बों सीना अय शहब्शाहे अर्जे मदीना

जिसको चौखट तेरी मिल गई है मिल गया उसको जन्नत का जीना

खौफ क्या उसको हो तेरे दर पर जिसकी मिटटी ठिकाने लगी है


अय जिगर गोश ए आमिना बी सुन लो फरियाद इस मुल्तजी की

बहरे गम के भँवर में फंसा है डूब जाए ना सरकार कश्ती

आओ आका मदद को शजर की इसको दुनियाँ सताने लगी है

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