حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

بن کے مداری جینا ہے بن کے مداری مرنا ہے

On: March 5, 2025 5:30 PM
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बन के मदारी जीना है बनके मदारी मरना है


बन के मदारी जीना है बनके मदारी मरना है
जीवन की पेचीदा ड़ग़र पे और हमें क्या करना है

सूऐ ज़न वलियों से रखना जंग खुदा से करना है
तेरा हर मग़रूर इरादा टूटना और बिखरना है
जैसा किया फ़ैज़ान के मुन्क़िर अब वैसा ही भरना है
madaarimedia.com
टकराना है जुल्म के तूफानो से हमारा काम
कुत्बे जहाँ के दीवाने कब सोंचते हैं अंजाम
तूफाँ तो आते रहते हैं तूफ़ाँ से क्या डरना है

लिखले मुसाफिर अपने दिल पे कुत्बे जहाँ का नाम
छुप जाऐगा आज का सूरज ढल जाऐगी शाम
इस जीवन की छाँव में तुझको थोड़ी देर ठहरना है

हिन्द की धरती हिन्द का साग़र तेरे ही गुन गाऐं
काली घटाऐ आँगन आँगन तेरा करम बरसाऐं
कहती है दरिया की रवानी बोलता सोज़ यह झरना है

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