حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

طیبہ کی آرزو میں جئے جارہا ہوں میں

On: March 5, 2025 5:31 PM
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तैबा की आरज़ू में जिये जा रहा हूं मैं
जामे ग़मे फ़िराक़ पिये जा रहा हूं मैं

तैबा की हाज़री का शरफ़ मिल गया मुझे
हर फिक्र को सलाम किये जा रहा हूं मैं
madaarimedia.com
अब क़ब्र के अंधेरों की परवाह नहीं मुझे

इश्क़े नबी का नूर लिये जा रहा हूं मैं

तैबा की रह गुज़र है निगाहों के सामने
जज़्बे जुनूँ मे सज्दे किये जा रहा हूं मैं

ऐ सोज़ जिसमें खुशबू है इश्क़े रसूल की
ज़हनों को ऐसे लफ्ज़ दिये जा रहा हूं मैं

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