حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

चेहरे से फूटते हुये अनवार भाई जी

On: March 5, 2025 4:41 PM
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 चेहरे से फूटते हुये अनवार भाई जी

कहते है तुम हो वारिसे सरकार भाई जी


किरदारे अली उसमें नजर आने लगा जब

देखा है हमने आपका किरदार भाई जी


ये दिल की तमन्ना है मेरे ख्वाब में आकर

चेहरा ही दिखा दे मुझे एक बार भाई जी


कुछ खौफ न था मौत का चेहरे पे आप के

मिलने को अपने रब से थे तैयार भाई जी


अब इनको नकीरैन गिरफतार क्या करें

है इश्क में आका के गिरफतार भाई जी


क्यों हश्र की गर्मी से मुरीद आपके डरें

जब आप दो जहां में हैं गमख्वार भाई जी


सूए शजर भी एक निगाहे करम हुजूर

ये आपसे रखता है बहुत प्यार भाई जी
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