حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

जल्वा दिखइये तैबा बुलाइये अय मेरे मुस्तफा मदनी मंदीने वाले

On: March 5, 2025 4:40 PM
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 जल्वा दिखइये तैबा बुलाइये अय मेरे मुस्तफा मदनी मंदीने वाले

बेचैन है नज़र अय शाहे बहरों बर अय नूरे किब्रिया मदनी मदीने वाले


काम आएगी न दौलत काम आएगी न शोहरत

काम आएगी हमेशा मेरे आका की मोहब्बत

दुनियाँ में हशर में उक्बा में कब्र में

काम आएंगे सदा मदनी मदीने वाले


जिसको उनका दर मिला है उसको सब कुछ मिल गया है

जिससे राजी मुस्तफा है उससे राजी किबरिया है

उनकी रजा है जो रब की रजा है वो

महबूबे किबरिया मदनी मदीने वाले


सबसे ऊँची बात तेरी सब से आला जात तेरी

तेरा सुरज चाँद तेरा दिन है तेरा रात तेरी

तू है मुख्तारे कुल तू है खत्मे रुसुल

तू शाहे दोसरा मदनी मदीने वाले


सुबहे मक्का शामे तैबा अब दिखा दो शाहे बत्हा

दिल में इतनी है तमन्ना देख लूँ मैं तेरा रौजा

मुझ पर करो करम अय साहेबे हरम

मिल जाए दर तेरा मदनी मदीने वाले


कैसा प्यारा है घराना रहमतों का है ख़जाना

जिसने दीं पर जान दे दी उस नवासे के हो नाना

करबल में कट गया वो सर जो आपने

चूमा या बारहा मदनी गदीने वाले


दूर इससे इसका घर है मुन्हसिर ये आप पर है

लाज रख ले अपने खूँ की ये तमन्नाए शजर है

हसरत है इल्म की चाहत है इल्म की

कर दो इसे अता मदनी मदीने वाले
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