حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

زمیں مداری ہے یہ آسماں مداری ہے

On: March 5, 2025 5:30 PM
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 ज़मीं मदारी है यह आसमाँ मदारी है

मदार सब के हैं सारा जहाँ मदारी है


लगी हुई है जो एक भीड़ गर्दे पेशे मज़ार

यह सारी बिखरी हुई कहकशाँ मदारी है


madaarimedia.com

है लफ्ज़ लफ्ज़ में इनके जमाल की खुशबू

किताबे ज़ीस्त की हर दास्ताँ मदारी है


हर एक मज़हबो मिल्लत पे इनका है एहसाँ

हर एक साक़िने हिन्दोस्ताँ मदारी है


चराग़ दीने मुहम्मद उधर हुऐ रौशन

गुज़र जिधर से गया कारबाँ मदारी है


मदार टीकरी अजमेर की यह कहती है

हमारे शहर का हर एक निशाँ मदारी है


कली भी खोल के लब दम मदार कहती है

यक़ीन आ गया हर गुलसिताँ मदारी है


मै सोज़ कैसे न क़िस्मत पे अपनी नाज़ करूँ

खुदा का शुक्र मेरा पासबाँ मदारी है
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