حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

जब परीशों हों नबी के उम्मती महशर के दिन

On: March 5, 2025 4:39 PM
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 जब परीशों हों नबी के उम्मती महशर के दिन

थाम लें बढ़ कर वो दामाने नबी महशर के दिन


रब बनाएगा उन्हीं को जन्नती महशर के दिन

जो भी हैं सच्चे गुलामाने नबी महशर के दिन


जिसमें शामिल हो न हुब्बे अहमदी महशर के दिन

काम आ सकती नहीं वो बन्दगी महशर के दिन


ये बिलालों जैदो सलमानों अनस से पूछिये

कितनी काम आई नबी की चाकरी महशर के दिन


अब्रे रहमत बनके गेसूए मुहम्मद छा गए

धूप की शिद्दत जो हद से बढ़ गई महशर के दिन


आबे कौसर जो पिलाऐगें नबी के इज़्न से

हैं उमर सिद्दीको उस्मानो अली महशर के दिन


हो वो इब्राहीमो इस्माईलो मूसा या के नूह

आसरा तुमसे लगाए हैं सभी महशर के दिन


पुरसिशे आमाल से डरता है क्यूँ तू अय शजर
काफी है बख्शिश को एक नाते नबी महशर के दिन
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