حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा

On: November 12, 2025 1:41 PM
Follow Us:
 ऐ खुदा के पाक महमां अलविदा

अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा


तुझमें ही नाजिल हुआ कुरआन है

चन्द ही दिन का अब तू महमान है

कर रहे है जिन्न व इन्सां अलविदा


अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा


खुलते हैं इस माह में जन्नत के दर

बन्द हो जाते हैं अबवाबे सकर

कैद हो जाता है शैतां अलविदा


अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा


रब करम फरमाता है इस माह में

रिज्क भी बढ़ जाता है इस माह में

मुश्किलें होती हैं आसाँ अलविदा


अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा


हिज्र से है गमजदा हर रोजा दार

छोड़ कर जाती है अब फसले बहार

गमजदा है हर गुलिस्तां अलविदा


अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा


दूर करके हम को हर आजार से

मगफिरत से रहमतो अनवार से

जा रहा है भर के दामां अलविदा


अल विदा ऐ माहे रमज़ाँ अलविदा
__

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment