حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

आ गये आगये आ गये आ गये आ गये आ गये मुस्तफा आ गये

On: March 5, 2025 4:40 PM
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 आ गये आगये आ गये आ गये आ गये आ गये मुस्तफा आ गये

परचमें अम्न आलम में लहरा गये आ गये आ गये मुस्तफा आ गये


नारे दोजख से हमको बचाऐगें वो हश्र के रोज जन्नत दिलाऐगे वो

कोई आफत जो सर पर कभी आएगी रहमतो की घटा बनके छाऐंगे वो

उम्मती आज फज़्ले खुदा पा गये आ गये आ गये मुस्तफा आ गये


झूमती धरती है झूमता है गगन आज बिखरी है खुशबू चमन दर चमन

जब अरब के घुघलके से फूटी किरन जगमगाने लगी अन्जुमन अन्जुमन

जो अंधेरे में थे रोशनी पा गये आ गये आ गये मुस्तफा आ गये


हर तरफ बारिशे नूर होने लगी तीरगी शिर्क की दूर होने लगी

जो जमीं कुफ्रो इल्हाद में चूर थी अब मसर्रत से मामूर होने लगी

उनके गेसू फजाओं में लहरा गये, आ गये आ गये मुस्तफा आ गये


मेहरबां खल्क पर हक़ तआला हुआ चेहरा जुल्मो तशदुद का काला हुआ

आप आए जहां ए में उजाला हुआ, दीन का हर तरफ बोल बाला हुआ

आप आए दुश्मने दीने इस्लाम थर्रा गए, आ गये गये मुस्तफा आ गये


नूह को उनके सदके किनारा मिला, हुस्ने यूसुफ को हुस्ने नज़ारा मिला

रंग लाई दोआए खलीली शजर, खल्क को अरश आज़म का तारा मिला

अम्बियाओ रुसुल मुददआ पा गये आ गये आ गये मुस्तफा आ गये
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