حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

ہر ظلم ہوا برباد کہ آئے میرے پیار نبی


On: March 5, 2025 5:31 PM
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हर जुल्म हुआ बर्बाद कि आए मेरे प्यारे नबी
अब कोई न हो नाशाद कि आए मेरे प्यारे नबी

रहमत के बादल बरसे हैं दुनिया की सूखी धरती पर
गुलशन में बहारें आई हैं सब फूलें फलें फल फूल शजर
मालिक ने सुनी फरियाद कि आए मेरे प्यारे नबी
madaarimedia.com
अब कुफ्र की दुनिया सूनी है सन्नाटे हैं बुत खानो में

हर सिम्त है इक शोरे मातम अब बिदअत के ऐवानो में
बातिल की हिली बुनियाद कि आए मेरे प्यारे नबी

बिखरे हैं सदाक़त के जलवे फारूक़िय्यत की बस्ती में
हैं नूरे सखावत नूरे विला इन्सानियत की हस्ती में
हर शख्श हुआ आबाद कि आए मेरे प्यारे नबी

सय्याद के पिंजरों के अन्दर दुख दर्द भरीं थीं आबाज़ें
ज़ालिम दुनिया ने पर काटे और छीन लीं जिनकी परवाज़ें
वो पंछी हुऐ आज़ाद कि आए मेरे प्यारे नबी

है सोज़, नहीं मज़लूमों को अब जुल्मों तशदुश का ख़तरा
आमद से उनकी खुश होकर कहता है यतीम इक इक बच्चा
अब होगी मेरी इमदाद कि आए मेरे प्यारे नबी

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