حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

मोईनी मुजीबी सखी या वलिय्यी तनज़्ज़र बिहालिल असी या वलिय्यी


On: March 5, 2025 4:41 PM
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 मोईनी मुजीबी सखी या वलिय्यी

तनज़्ज़र बिहालिल असी या वलिय्यी


अना अस्फ्‌लो अन्ता इब्नो अलिय्यिन

अना अज़्लमो अन्ता नूरो नबीयिन

फनव्विर बे नूरिन्नबी या वलिय्यी


तनज्जर बेहालिल्असी या वलिय्यी


न क्यों देखे हैरत से अर्शे मोअल्ला

मेरी ये जबीने मुजल्ला मुजल्ला

अकीदत के सजदे लुटाए हैं इसने

मिली जब है चौखट तेरी या बलिय्यी


तनज्जर बेहालिल्असी या वलिय्यी


मदास्ददुना या मदारल्वराए

मुगीसल हुमूमे समीउद्दुआए

खबीरल जली वल ख्रफी या वलिय्यी


तनज़्ज़र बेहालिल असी या वलिय्यी


गुलिस्ताने अवासो अक्ताब सारे

है तेरे ही झरनो से सैराब सारे

नहीं इस जहाँ में वली कोई जिसको

न पहुँची हो निस्बत तेरी या वलिय्यी


तनज्जर बेहालिल्असी या वलिय्यी


व अन्जुर इलैना बेनज़रिल करामा

जरल्लाहो अन्का उयूनस्सख़ावा

हबीबन्नबी मुरशिदी या वलिय्यी


तनज़्ज़र बेहालिल असी या वलिय्यी


खड़े हैं सभी आशिके ज़ार तेरे

तेरे फज़्ल के सब तलबगार तेरे

मुरादों से अय आका दामन को भर दो

तेरे दर पे है क्या कमी या वलिय्यी


तनज्जर बेहालिल्असी या वलिय्यी


इजा तदख़लो हिन्दना या मदारो

तोवस्सुस बेना इस्सना या मदारो

तोबल्लिगना दीनन्नबी या वलिय्यी


तनज़्ज़र बेहालिल असी या वलिय्यी


अकीदत से जो भी है इसमें नहाता

शिफा सारी बीमारियों से है पाता

ये है हर मरज़ की दवा कुत्बे आलम

तेरे दर की ईसन नदी या वलिय्यी


तेरे दर का ज़र्रा लगे है नगीना

फिदा इसमें हैं दो जहाँ का खजीना

जो मंगता तेरे आस्तों का है आका

फिदा उसपे शाहिशही या वलिय्यी


तनज्जर बेहालिल्असी या वलिय्यी
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