حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

शाह भी उनके दरबार में बिक गए


On: March 5, 2025 4:40 PM
Follow Us:
 शाह भी उनके दरबार में बिक गए

जो मदीने के बाजार में बिक गए


कोई अन्दाजा कीमत का क्या कर सके

हम तो जा कर दरे यार में बिक गए


गौसो अक्ताबो अफ्रादो अबदाल सब

जो गए तेरे दरबार में बिक गए


छा गई हर तरफ जिस घड़ी नफरतें

या नबी हम तेरे प्यार में बिक गए


मुफ्ती तौहीने कब्रे रिसालत करें

जो थे अपने वह अगयार में बिक गए


शह ने सब्रो तहम्मुल खुदा से लिया

और लईं तीरो तलवार में बिक गए


हों वह सिद्दीको फारूको उस्माँ अली

तेरे चेहरे के अनवार में बिक गए


जिसको खतरा नहीं है खिज़ां का कभी

हम शजर ऐसे गुलज़ार में बिक गए


अहसना मिनका हस्सान ने जब कहा

हम शजर उनके अशआर में बिक गए
__

Poetry group

Join Now

Artical group

Join Now

My WhatsApp Channel

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment