حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

हुजूरी की हर दम दुआ माँगते हैं इन आँखों में आँसू मचलते मचलते


On: March 5, 2025 4:39 PM
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 हुजूरी की हर दम दुआ माँगते हैं इन आँखों में आँसू मचलते मचलते

दयारे मदीना से हम दूर रहकर कहाँ तक रहेगें तड़पते तड़पते


तेरी जुल्फ का मोजिजा है ये आका दो आलम रहेगें महकते महकते

जिया चाँद तारों को देता रहेगा तेरा नूरी तल्वा चमकते चमकते


हर एक आँख नम थी हर एक दिल में गम था मदीने में था एक कोहराम बरपा

सुनी अहले तैबा ने बादे नबी जब अजाने बिलाली बिलखते बिलखते


यही आरजू है यही है तमन्ना बस एक बार मैं देख लू तेरा रौजा

बुला लो मदीने में अय मेरे आका हुई एक मुददत तड़पते तड़पते


करूँ मदह तेरी क्या औकात मेरी कहाँ नाते सरवर कहाँ जात मेरी

तेरा ही वुफूरे करम है ये आका संभलता रहा हूँ बहकते बहकते


अकेला शजर ही नहीं मदहख्वाँ है नबी का तो मद्दाह सारा जहाँ है

हैं गाते परिन्दे भी नग्में नबी के हर एक सुब्ह उठकर चहकते चहकते
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