حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

तुमने लुटाया दीं पे भरा घर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


On: March 5, 2025 4:41 PM
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 तुमने लुटाया दीं पे भरा घर

सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


वादा किया जो उसको निभाना जुल्म के आगे सर न झुकाना

अज़मते काबा घटने न पाये चाहे पड़े घर अपना लुटाना

ख्वाब में बोले नाना ये आकर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


हाथ के बदले में मिले पानी जो है नबी की पाक निशानी

बोले ये आका हाथ में मेरे कौसरो जमजम की है रवानी

हाय बचाया सर को कटा कर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


लौट के भाई भी नहीं आया सर से उठा है बाप का साया

तैबा में सुगरा भी न मिलेगी बहन को भी वह देख न पाया

रह गया तन्हा आबिदे मुजतर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


कहने लगी है सुगरा ये रो कर फूफी नहीं है और न असगर

बाबा गये है जानिबे करबल सारा घराना साथ में ले कर

हो गया सूना हाय मेरा घर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


बोली सकीना प्यास लगी है नहर भी बिल्कुल पास लगी है

कोई नहीं अब पानी जो लाये आप से बाबा आस लगी है

आयी है मेरी जान लबों पर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


सब्र किया है जुल्म सहे हैं हाय वो बच्चे काँप रहे हैं

जिनके फरिश्ते नाज़ उठायें खून के आँसू उनके बहे हैं

खाया किसी ने तर्स न उन पर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


देने सलामी कब्रे नबी पर पहुंचे अदब से जहरा के दिलबर

बाद में कब्रे बिन्ते नबी पर रो के यह बोले वारिसे कौसर

अब न मदीने आयेंगे मादर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


तुझ को अय सुगरा सब्र खुदा दे दर्द बढ़ा है कौन दवा दे

दिल की तमन्ना रह गयी दिल में खालिको मालिक इस का सिला दे

रूह न निकली दस्ते शहा पर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर


हश्र में भी एक हश्र बपा है खल्के खुदा सब काँप रही है

हाथ में ले कर खून के कपड़े बच्चों का हक मांग रही है

फात्मा जहरा बिन्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर सिब्ते पयम्बर
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