حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

वहाँ जर्रा जर्रा महो कहकशाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


On: March 5, 2025 4:39 PM
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 वहाँ जर्रा जर्रा महो कहकशाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है

वहीं सरनिगूँ रिफअते आस्माँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


अबूबकरो उस्मानो फारुको बूज़र अली फात्मा और शब्बीरो शब्बर

बताऊँ के इन सब का मरकज कहाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


वहाँ से हुई दूर है बेजुबानी वहाँ उतरा है मस्हफे आस्मानी

वहीं से मिली वे जुबाँ को जुबाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


वहीं पे तो हैँ शाफए रोजे महशर वहीं पर तो है मालिके हौजे कौसर

वहीं हश्र की धूप का साएबाँ हैं मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


इलाजे जिगर की ज़रुरत नहीं है मुझे चारागर की जरुरत नहीं है

मेरे हर मरज़ की दवा तो वहाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


दरे सरवरे दीँ पे उफ् भी न करना अय जाइर अदब उनका मल्हूज़ रखना

वहाँ हर कदम इश्क का इतिहाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


अजब हुज्रए आएशा का है मन्जर है जल्वा गहे अहले बैते पयम्बर

वहाँ अपना घर याद आता कहाँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है


नजारे सितारे ये बर्गो शजर भी जिया लेने आते है शम्सो कमर भी

वहाँ मरकजे हुस्ने हर गुलिस्ताँ है मदीना जहाँ है मदीना जहाँ है
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