حمد نعت مناقب اہل بیت منقبت نوحہ مناقب قطب المدار صلاۃ و السلام رباعی غزل

سر سجدهٔ خالق میں ہے اور لب پہ دعا ہے


On: March 5, 2025 5:31 PM
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सर सज्दए ख़ालिक़ मे है और लब पे दुआ है
उम्मत के लिये क्या नहीं आक़ा ने किया है

अल्लाह रे क्या अज़मते महबूबे खुदा है
खुद अर्श-ए-बरीं बढ़ के क़दम चूम रहा है
madaarimedia.com
क्या सल्ले अला गुलशने महबूबे खुदा है

जो फूल है खुशबूऐ मौहम्मद में बसा है

उस बच्चे को क्या होगा ग़में दर्द यतीमी
जो रहमते कौनैन की गोदी में पला है

क्या अपनी जुबाँ से कहूँ हाले ग़में दौराँ
जो बीत रही है मेरे आक़ा को पता है

बस गुम्बदे ख़ज़रा की ज़ियारत हो मुयस्सर
दिल में कोई ख्वाहिश ही नही इसके सिवा है

दुनिया के शहनशाहों से बेहतर है वो ए सोज़
आका की गुलामी का शरफ़ जिसको मिला है

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